





वीरभद्र
प्रथम जाट वीरभद्र की उत्पत्ति
हम बात करने वाले हैं जाटों के पूर्वज प्रथम जाट के जन्म के बारे में प्रथम जाट का जन्म कब, कहां ओर कैसे हुआ।
ब्रह्मा जी के पुत्र थे राजा दक्ष और राजा दक्ष की पुत्री थीं माता सती और माता सती के बारे में तो हम सभी जानते हैं कि माता सती भगवान शिव की धर्मपत्नी थीं। एक बार माता सती के पिता राजा दक्ष ने एक बड़े यज्ञ का आयोजन रखा जिसमें भगवान विष्णु, ब्रह्मा और सभी देवी – देवताओं, ऋषि मुनियों को बुलाया गया लेकिन भगवान शिव जो कि राजा दक्ष के मान (दामाद) भी थे उन्हें न्यौता नहीं दिया। लेकिन माता सती बिना न्यौते के अपने पिता के यहां पहुंच गईं। उस यज्ञ के बीच में राजा दक्ष ने भगवान शिव के बारे में बहुत गलत बातें कहीं जिसे माता सती सहन न कर सकीं और उन्होंने अग्निकुंड में देह त्याग कर दिया। जब भगवान शिव को ये बात पता चली तो उनका ह्रदय पीड़ा और क्रोध से भर गया, भगवान शिव खुद हिंसा नहीं करना चाहते थे इसलिए उन्होंने अपनी जटाओं से एक केश (बाल) तोड़ा और जमीन पर पटक कर दे मारा जिससे एक विशालकाय वीरभद्र नामक देव उत्पन्न हुआ जो शिव का एक छोटा सा हिस्सा है। शिव का आदेश पाकर वीरभद्र ने राजा दक्ष के यहां सब कुछ तहस नहस कर दिया जबकि राजा दक्ष भी बहुत पराक्रमी थे लेकिन वीरभद्र के सामने टिक पाना किसी के भी बस की बात नहीं थी। वीरभद्र ने राजा दक्ष की सम्पूर्ण सेना का नाश कर देवताओं और ऋषियों को परास्त कर राजा दक्ष का गला धड़ से अलग कर दिया। वीरभद्र का वर्णन एक भयानक योद्धा के रूप में किया जाता है जो असुरों और अधर्म के संहारक हैं।
आज के जाट समुदाय के जो लोग हैं उनके पूर्वज भगवान शिव की जटा (केश) से उत्पन्न वीरभद्र थे, जो कि जाट थे।
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